इस आर्टिकल को पढ़ लिया तो उमरान मलिक बन जायेंगे भारत के सबसे बढ़िया गेंदबाज़

ब्रायन लारा sunrisers hyderabad के साथ जुड़े थे और इसी टीम से भारत का सबसे तेज गति का गेंदबाज़ भी निकला हे जिसका नाम सब जानते हैं। जी हाँ, उमरान मालिक जो लगातार 150 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज़्यादा गति से गेंद कर सकते हैं।

पर इतनी गति के बाद भी उनके रिकॉर्ड पर एक बार नज़र मारते हैं। 10 ODI मैच में 13 विकेट , इकॉनमी रेट 6.4 का और 8 T20 में 11 विकेट और इकॉनमी रेट 10.4 का, इसका मतलब 20 ओवर T20 मैच में उमरान मालिक ही गेंदबाज़ी करें तो टीम का स्कोर हो जायेगा 210 रन 7 विकेट के नुक्सान पर। कुछ मज़ा सा नहीं आया ना ?

इतना अच्छा गेंदबाज़ और हर ओवर में 10 से ज़्यादा रन पिटाता हे 20-20 में। इसका मतलब एक चीज़ तो साफ़ हे की खाली स्पीड से तो कुछ नहीं होगा।

और इसी बात पे ज़ोर डाला हे अपने ज़माने के महानतम बल्लेबाज़ों में आने वाले ब्रायन लारा ने।

ब्रायन लारा ने कहा हे की उमरान मालिक को स्किल्स पे ध्यान देना चाहिए और अपनी गेंदबाज़ी में वेरिएशन ऐड करना चाहिए। इससे पहले भी भारतीय गेंदबाज़ R P Singh ने भी उमरान मालिक को स्किल्स डेवेलोप करने की सलाह दी हे। पर किस स्किल्स की बात कर रहे हैं ये क्रिकेट पंडित।

स्किल्स की बात हो रही हे जैसे ऑउटस्विंग, उमरान मालिक का जैसा एक्शन हे अगर वो गेंद फेंकते हुए थोड़ा सा सीम पोजीशन बहार रखके हल्का सा हाथ बहार की तरफ घुमाएंगे तो गेंद अछि ऑउटस्विंग होगी और वही अंदर गेंद लाना उनके एक्शन तो बहुत आसान हे।

जिमी एंडरसन का हालांकि जो एक्शन था उसमें थोड़ा सा कर्वे होता हे जिससे गेंद को वो आसानी से अंदर बहार कर पाते हैं, उमरान मालिक के एक्शन में उतनी लचक तो नहीं हे पर फिर भी उन्हें ऑउटस्विंग करने में ज़्यादा दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

दूसरी सबसे बड़ी बात हे फील्ड पे रहते हुए अपने दिमाग का इस्तेमाल करना।

जब भी आप उमरान मालिक को फील्ड पे देखोगे तो हस्ता हुआ पाओगे। हालांकि हसना बुरी बात नहीं हे पर उनको देखके कभी भी ऐसा नहीं लगता की उनके दिमाग में कुछ चल रहा हे।

वो कुछ सोच रहे हैं की ऑफ स्टंप के बहार स्लोवेर गेंद काराओं बाउंसर टाइप और स्क्वायर कवर पे पीछे खिलाडी रख दूँ तो शायद ये आउट हो जाए, या स्लोवेर बाउंसर दाल दूँ या फिर लौ फुलटॉस डालदून।

उनको देखकर लगता नहीं की उनके दिमाग में कोई भी गेमप्लान चल रहा हे और ऐसा लगता बस उन्हें एक चीज़ आती हे की यस बोलो भागों और बॉडी में जितनी जान हे उससे बॉल फेंक दूँ।

इस तरह की गेंदबाज़ी से पुछल्ले बल्लेबाज़ या क्लब क्रिकेट, रणजी क्रिकेट में तो सफलता मिल जाएगी पर जो टॉप क्लास बल्लेबाज़ हैं या थोड़े से भी अच्छे बल्लेबाज़ हैं वो गेंदबाज़ी की हसी उड़ा देंगे , जो की वो उमरान मलिक के साथ कर रहे हैं

आजकल के बल्ले तो सबको पता ही हैं थोड़ा सा आपने बल्ले का चेहरा खोला और बॉल गैप में निकल दी तो 4 रन , ऐसे में अगर आपके पास न वेरिएशन हे न आपके दिमाग में कुछ भी गेम प्लान हे, की आपने कुछ वीडियो देखि हो batsman की कहाँ कैसे खेलता हे, इसका क्या एरिया स्ट्रांग हे, क्या कमजोर , इसको स्लो बॉल डाल सकता हूँ या नहीं, तो फिर तो कुछ नहीं होगा भाई।

फिर आप ज़्यादा से ज़्यादा 10-11 मैच खेल लोगे और वही हाल हो जायेगा जैसे खलील अहमद, आवेश खान का हुआ।

एक बार जो टीम से निकले तो फिर हमेशा के लिए निकले।

इसलिए उमरान मालिक जितना जल्दी ये समझेंगे जितना अपने दिमाग का इस्तेमाल करेंगे अपनी स्पीड के साथ, उतना उनके लिए
भी अच्छा होगा और टीम इंडिया के लिए।

हम बस यही उम्मीद रखते हैं की इस कटाक्ष वाले सच आर्टिकल को पढ़कर उमरान मलिक सच में नेट्स में पसीना बहाएं और थोड़ा दिमाग से गेंद फेकें, वार्ना क्रिकेट में जो जितना जल्दी ऊपर उठता हे उतना जल्दी क्रिकेट उससे भुला भी देती हे। और 19 मैच खेलने के बाद उमरान मलिक को समझ जाना चाइये की मौके उन्हें बहुत मिल चुके हैं और अब मौकों को भुनाने की बारी आ गयी हे।

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